भूमाफिया, वन माफिया और जल बर्बाद करने वालों के खिलाफ सजग हों नागरिक: मुख्यमंत्री योगी

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कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें: योगी

NEWS1UP

संवाददाता

लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनभागीदारी का विषय बताते हुए प्रदेशवासियों से प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूमाफिया, वन माफिया, अवैध खनन करने वाले गिरोह और तस्कर केवल कानून के ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भी अपराधी हैं। ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें रोकना प्रत्येक जागरूक नागरिक का दायित्व है।

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने पर्यावरणीय संकटों, जल संरक्षण, पौधरोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

कोई टोंटी चुरा रहा है, कोई पानी बहा रहा है

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई सार्वजनिक स्थानों से टोंटी चुरा रहा है और कोई पानी व्यर्थ बहा रहा है। ऐसे लोगों को समाज को स्वयं टोकना होगा।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा, क्योंकि जल संकट और जलवायु परिवर्तन आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौतियां बनने जा रही हैं।

पर्यावरणीय बदलाव की कीमत चुका रही दुनिया

सीएम योगी ने कहा कि 40 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति पिछले दो-तीन दशकों में मौसम के स्वरूप में आए बदलाव को आसानी से महसूस कर सकता है। उन्होंने बताया कि मौसम चक्र लगभग एक से डेढ़ महीने तक खिसक चुका है, जिसका सबसे बड़ा असर कृषि और किसानों पर पड़ रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो खाद्यान्न संकट, बाढ़, सूखा और असामयिक प्राकृतिक आपदाएं भविष्य में और भयावह रूप ले सकती हैं।

रामायण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भगवान राम के प्रसिद्ध कथन “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभूमि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भारतीय संस्कृति का मूल भाव है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल आधुनिक आवश्यकता नहीं बल्कि भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा रहा है।

प्रकृति से जुड़ी है भारतीय संस्कृति

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति में पशु-पक्षियों और प्रकृति के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव के नंदी, कार्तिकेय के मोर, गणेश के मूषक और मां दुर्गा के सिंह जैसे प्रतीक यह बताते हैं कि भारतीय सभ्यता ने सदैव जैव विविधता और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश दिया है।

वन बचेंगे तो शहर भी बचेंगे

लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित क्षेत्र किसी भी शहर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि जहां लखनऊ का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहीं कुकरैल क्षेत्र में यह कई डिग्री कम रहता है।

उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों से मुक्त कराए गए कुकरैल क्षेत्र में आज विकसित हो रहा ‘सौमित्र वन’ पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर दिलाए पांच संकल्प

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच महत्वपूर्ण संकल्प भी दिलाए।

एक पेड़ अपनी मां के नाम लगाना

लगाए गए पौधों की सुरक्षा करना

जल संरक्षण को प्राथमिकता देना

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना

प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाना

जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में जहां वन विभाग की नर्सरियों में केवल पांच लाख पौधे उपलब्ध थे, वहीं आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ से अधिक पौधे तैयार हैं। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई में प्रदेशव्यापी महाअभियान के तहत एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में पांच करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है।

तालाब, पोखर और जलाशयों को बचाने की अपील

मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों, नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया कि वे तालाबों, पोखरों, कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण का सबसे मजबूत आधार पारंपरिक जल स्रोत ही हैं।

उन्होंने गोरखपुर के रामगढ़ताल और चिलुआताल के संरक्षण के उदाहरण देते हुए बताया कि इन प्राकृतिक जलाशयों ने न केवल पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत किया है बल्कि स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

242 करोड़ पौधे और बढ़ता वन क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश ने एक ओर जहां देश में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट विकसित किए हैं, वहीं दूसरी ओर पिछले नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाकर वन क्षेत्र बढ़ाने में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या भी एक से बढ़कर 13 हो गई है, जो जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरा संबोधन एक स्पष्ट संदेश देता है कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी। समाज को स्वयं आगे आकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा करनी होगी।

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