शेष 4% विकसित भूखंड की मांग पर उबल पड़े 44 गॉंवों के किसान, नोएडा प्राधिकरण पर निकाला मौन मार्च
जल्द फैसला नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। शेष 4 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड की मांग को लेकर सोमवार को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के 44 गांवों के किसानों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में एकत्रित किसानों ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण कार्यालय तक शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और अपनी वर्षों पुरानी मांगों के समाधान की जोरदार पैरवी की।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अधिकांश किसानों को अब तक केवल 6 प्रतिशत विकसित भूखंड ही आवंटित किए गए हैं। शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड का मामला लंबे समय से फाइलों में उलझा हुआ है, जिससे किसानों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।

किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के वर्ष 2011 के आदेशों तथा बाद में हुए विभिन्न प्रशासनिक एवं न्यायिक निर्णयों के अनुसार किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर और 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड दिए जाने का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पात्र किसान आज भी अपने अधिकार से वंचित हैं।
बोर्ड बैठक का प्रस्ताव भी अटका
किसानों ने प्राधिकरण और शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक में 26 दिसंबर 2023 को पात्र किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह प्रस्ताव शासन की स्वीकृति के लिए भेजा गया, लेकिन करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बोर्ड के निर्णय और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद किसानों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
किसानों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सरकार और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए लंबित प्रस्ताव को स्वीकृति दिलाने तथा शेष 4 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंडों का आवंटन शीघ्र सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों के साथ किए गए वादों को अब और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता।
ओएसडी को सौंपा ज्ञापन, दिया अल्टीमेटम
प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी को ज्ञापन सौंपकर मामले के शीघ्र समाधान की मांग की। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि वर्षों पुरानी इस समस्या का जल्द निस्तारण नहीं हुआ और शासन स्तर पर लंबित प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली, तो किसान व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
मौन जुलूस में बड़ी संख्या में किसान और किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन किसानों के तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति तथा किसान आंदोलन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
