महागुनपुरम सोसाइटी में कर्मचारियों की हड़ताल, सुरक्षा और मेंटेनेंस व्यवस्था ठप

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न्यूनतम वेतन से कम भुगतान का आरोप, सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग स्टाफ, प्लम्बर और इलेक्ट्रीशियन हड़ताल पर

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। एनएच-9 स्थित महागुनपुरम सोसाइटी में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब सोसाइटी में तैनात सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग कर्मचारी, प्लम्बर और इलेक्ट्रीशियन एक साथ हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों के काम बंद करते ही सोसाइटी की सुरक्षा और मेंटेनेंस व्यवस्था लगभग ठप हो गई, जिससे हजारों निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से काफी कम भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों ने मेंटेनेंस एजेंसी सीएसके कंपनी पर श्रम कानूनों के उल्लंघन और कर्मचारियों के शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।

हड़ताल पर बैठे सुरक्षा और मेंटेनेंस स्टाफ

कर्मचारियों के अनुसार हाउसकीपिंग स्टाफ के पुरुष कर्मियों को मात्र 9 हजार रुपये तथा महिला कर्मचारियों को 8,700 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। वहीं सिक्योरिटी गार्ड्स को केवल 11 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। गार्ड्स का कहना है कि उनसे प्रतिदिन 12 घंटे ड्यूटी कराई जाती है और महीने भर में कोई अवकाश भी नहीं दिया जाता।

हड़ताल में शामिल प्लम्बर और इलेक्ट्रीशियन का आरोप है कि उन्हें कुशल श्रेणी का कर्मचारी होने के बावजूद निर्धारित वेतन नहीं दिया जा रहा। एक कर्मचारी ने बताया कि उसे केवल 13,700 रुपये वेतन मिलता है, जबकि महीने में मात्र दो छुट्टियां दी जाती हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे लगातार 12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन अतिरिक्त समय का कोई ओवरटाइम भुगतान नहीं किया जाता।

एक चेक पर दो कर्मचारियों की तनख्वाह देने का आरोप

कर्मचारियों ने भुगतान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी ने दो कर्मचारियों के वेतन का भुगतान एक ही चेक के माध्यम से किया है, जिसे उन्होंने अभी तक कैश नहीं कराया है। कर्मचारियों का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल संदिग्ध है बल्कि श्रम नियमों के भी विपरीत है।

सरकारी मानकों से कम वेतन का मामला

गौरतलब है कि इसी वर्ष अप्रैल माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन दरों का संशोधन किया गया था। इसके तहत अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल कर्मचारियों के लिए 15,059 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक वेतन निर्धारित किया गया था।

ऐसे में महागुनपुरम के कर्मचारियों को निर्धारित मानकों से कम वेतन मिलने के आरोप ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उन्हें शासन के निर्देशानुसार वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

पहले भी हो चुकी है हड़ताल

सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पूर्व भी कर्मचारी इसी मुद्दे को लेकर हड़ताल पर गए थे। उस समय श्रम विभाग की अधिकारी मौके पर पहुंची थीं और कर्मचारियों से बातचीत की थी। हालांकि गुरुवार को मामले में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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