बिजली उत्पादन से हाइड्रोजन हब तक: NTPC दादरी की नई उड़ान
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना के साथ स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन के नए युग का नेतृत्व कर रहा है दादरी
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भूमेश शर्मा
लखनऊ/दादरी। कभी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख ताप विद्युत संयंत्र के रूप में पहचाना जाने वाला एनटीपीसी दादरी अब एक नई पहचान गढ़ रहा है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में दशकों से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह प्रतिष्ठान अब ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के माध्यम से भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुक्रवार को हाइड्रोजन ईंधन से संचालित बसों को हरी झंडी दिखाए जाने के साथ ही एनटीपीसी दादरी की ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

यह केवल तीन बसों का शुभारंभ नहीं है, बल्कि उस भविष्य की झलक है जिसमें सार्वजनिक परिवहन डीजल और पेट्रोल पर नहीं, बल्कि स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों पर आधारित होगा।
भविष्य के ईंधन पर दांव
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है। इसी सोच को साकार करते हुए एनटीपीसी दादरी ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और उसके परिवहन क्षेत्र में उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। परियोजना की विशेषता यह है कि हाइड्रोजन उत्पादन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शोधित जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, बल्कि जल संरक्षण के उद्देश्य को भी बल मिल रहा है।
हाइड्रोजन बसें बदलेंगी परिवहन की तस्वीर

एनटीपीसी दादरी की परियोजना के तहत तैयार की गई प्रत्येक हाइड्रोजन बस में 42 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरने पर बस लगभग 750 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। यह क्षमता लंबी दूरी की सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के लिए इसे एक व्यवहारिक और टिकाऊ विकल्प बनाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन बसों से धुआं, कार्बन या अन्य प्रदूषक गैसें नहीं निकलतीं। इनके संचालन के दौरान उत्सर्जन के रूप में केवल जल उत्पन्न होता है। यही कारण है कि विकसित देशों में हाइड्रोजन आधारित परिवहन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यावरण को मिलेगा बड़ा लाभ
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना के पर्यावरणीय लाभ भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। अनुमान है कि इस पहल से हर वर्ष लगभग एक हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा परियोजना से प्रतिदिन लगभग 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो करीब 1750 पेड़ लगाए जाने के बराबर पर्यावरणीय योगदान माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है तो यह शहरी प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
केवल बिजलीघर नहीं, नवाचार का केंद्र
एनटीपीसी दादरी की पहचान अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। सौर ऊर्जा, गैस आधारित उत्पादन और अब ग्रीन हाइड्रोजन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर यह प्रतिष्ठान ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार का केंद्र बनता जा रहा है। यही कारण है कि ऊर्जा विशेषज्ञ इसे भारत की ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं।
