नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विधानसभा में गरजे योगी आदित्यनाथ

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विपक्ष पर महिला सशक्तीकरण में बाधा बनने का आरोप, 33% आरक्षण को बताया ऐतिहासिक कदम

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा का प्रस्ताव रखते हुए विपक्ष, खासतौर पर समाजवादी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव का विरोध कर “महिला सशक्तीकरण के रास्ते में बाधा” बनने का काम किया।

आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्धारण और कानून निर्माण में भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 15% और यूपी विधानसभा में 11-12% है, जिसे 33% आरक्षण से संतुलित किया जा सकता है। उन्होंने इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को दिया।

योजनाओं और उपलब्धियों का जिक्र

सीएम ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि जनधन योजना के तहत करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खुले, स्वच्छ भारत मिशन में बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण हुआ और उज्ज्वला योजना से महिलाओं को गैस कनेक्शन मिला। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी संख्या में घर महिलाओं के नाम पर दिए गए, जिससे उन्हें पहली बार मालिकाना हक मिला।

विपक्ष पर तीखे आरोप

योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल लगातार महिला-संबंधी सुधारों का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए मायावती के साथ हुए दुर्व्यवहार को भी उठाया और कहा कि यह विपक्ष के “चरित्र” को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने तीन तलाक कानून और शाहबानो प्रकरण जैसे मुद्दों पर कांग्रेस के रुख को भी कटघरे में खड़ा किया।

महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण पर दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद राज्य में महिला सुरक्षा में सुधार हुआ है और अपराधों में कमी आई है। उन्होंने बताया कि महिला कार्यबल भागीदारी 13% से बढ़कर 36% से अधिक हो गई है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक शक्ति देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, लेकिन विपक्ष का रवैया इस दिशा में बाधक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इस विषय पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

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