15 करोड़ के IFMS पर सियासत गरम, लैंडक्राफ्ट सोसाइटी का चुनाव बना हाई-वोल्टेज मुकाबला !
टीम अथीवा की प्रत्याशी का बड़ा ऐलान
जरूरत पड़ी तो अदालत तक जाएगी लड़ाई
सुरक्षा और पार्किंग पर भी तीखी बहस
NEWS1UP
एओए/आरडब्लूए डेस्क
गाजियाबाद। एनएच-24 स्थित गोल्फ लिंक्स टाउनशिप की चर्चित लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में रविवार को होने वाला चुनाव अब पूरी तरह हाई-वोल्टेज मुकाबले में तब्दील हो चुका है। मतदान से ठीक पहले एक प्रत्याशी की बड़ी घोषणा ने चुनावी सरगर्मी को और तेज कर दिया है। अब चुनाव का पूरा केंद्र बिल्डर पर बकाया करीब 15 करोड़ रुपये के IFMS और सोसाइटी की सुरक्षा व्यवस्था बन गया है।
चुनावी मैदान में उतरी टीम अथीवा की प्रत्याशी वत्सला भारद्वाज ने वीडियो संदेश जारी कर निवासियों के सामने बड़ा वादा किया है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें बोर्ड में आने का अवसर मिला तो बिल्डर से IFMS की बकाया राशि वापस कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
वत्सला भारद्वाज ने कहा कि-

यदि इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी, तो वे उससे पीछे नहीं हटेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि चुनाव जीतने के बाद सोसाइटी की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ और आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि निवासियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
सुरक्षा और पार्किंग भी बना बड़ा मुद्दा
दूसरी ओर चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी अनुज शर्मा भी सुरक्षा व्यवस्था को प्रमुख चुनावी मुद्दा बता रहे हैं।
उनका कहना है कि-

सोसाइटी में ग्राउंड पार्किंग की स्थिति बेहद अव्यवस्थित है, जिसके कारण आए दिन निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें मौका मिला तो पार्किंग प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
दो वर्षों से अटका पड़ा है 15 करोड़ का IFMS
दरअसल सोसाइटी में IFMS का मुद्दा पिछले करीब दो वर्षों से विवाद का केंद्र बना हुआ है। निवासियों के मुताबिक बिल्डर पर लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि IFMS के रूप में बकाया है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को हस्तक्षेप कर बिल्डर से यह राशि वापस कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होने से निवासियों के बीच असंतोष बना हुआ है और यही मुद्दा चुनावी बहस का मुख्य आधार बन गया है।
11 उम्मीदवार मैदान में, 10 का चयन तय
रविवार को होने वाले इस चुनाव में कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि नियमों के अनुसार बोर्ड के लिए 10 सदस्यों का चुना जाना है। यानी एक प्रत्याशी का बाहर होना तय है और यही स्थिति चुनाव को और दिलचस्प बना रही है।
बताया जा रहा है कि टीम अथीवा के 6, दूसरे गुट के चार उम्मीदवार, जबकि एक अन्य प्रत्याशी स्वतंत्र रूप से मैदान में हैं।
एक हार से बदल सकता है पूरा समीकरण
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीम अथीवा का कोई उम्मीदवार हारता है, तो पूरी टीम की रणनीति कमजोर पड़ सकती है। वहीं यदि दूसरे गुट का कोई प्रत्याशी हारता है, तो उनका प्रभाव कम हो जाएगा। कई मतदाताओं का यह भी मानना है कि दोनों पक्षों से पांच-पांच सदस्य जीतकर बोर्ड में पहुंच सकते हैं, जिससे बाद में पदाधिकारियों के चयन को लेकर दिलचस्प राजनीतिक स्थिति पैदा हो सकती है।
पिछले वर्ष विवादों में रहा था बोर्ड
बीते वर्ष सोसाइटी बोर्ड के अंदरूनी विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और IFMS के बकाया धन को लेकर माहौल काफी गरम रहा था। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस जांच तक पहुंच गया। इसी वजह से सोसाइटी के एक बड़े वर्ग में इस बार चुनाव को लेकर कुछ हद तक उदासीनता भी देखने को मिल रही है।
निष्पक्ष चुनाव का दावा
चुनाव समिति के सदस्य एस. के. भटनागर ने बताया कि-

चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी, ताकि किसी प्रकार का विवाद न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फर्स्ट ओनर को ही मतदान का अधिकार होगा।
15 की शाम तक साफ होगा चुनावी गणित
अब पूरे सोसाइटी परिसर में एक ही चर्चा है-
क्या टीम अथीवा अपने सभी उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सफल होगी ?
क्या पुराने बोर्ड से जुड़े चेहरे फिर से सत्ता में वापसी करेंगे ?
क्या ग्यारहवां उम्मीदवार ‘किंगमेकर’ बनकर समीकरण बदल देगा ?
इन सभी सवालों के जवाब 15 मार्च की देर शाम तक सामने आ जाएंगे, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि लैंडक्राफ्ट सोसाइटी का यह चुनाव निवासियों के लिए बेहद दिलचस्प और निर्णायक मुकाबला बन गया है।
