ई-रजिस्ट्री पर संशय बरकरार, तहसील में अधिवक्ताओं की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी
लिखित स्पष्टीकरण मिलने तक नहीं होगा कामकाज, सहायक आयुक्त स्टांप की अपील भी बेअसर
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर जारी असमंजस और आशंकाओं के बीच गाजियाबाद तहसील बार एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल को अनिश्चितकाल तक जारी रखने का फैसला किया है। अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों का कहना है कि जब तक शासन स्पष्ट लिखित आदेश जारी कर यह नहीं बताता कि प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद और विभिन्न विकास प्राधिकरणों के अलावा अन्य संस्थाएं ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगी, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

4 जून की घोषणा के बाद शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने 4 जून को ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए कहा था कि अब लोगों को रजिस्ट्री कराने के लिए उप निबंधक कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और निर्धारित कोड के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। सरकार के इस कदम को रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा सुधार बताया गया था।
हालांकि इस घोषणा के बाद अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अन्य लोगों में आशंका और विरोध के स्वर तेज हो गए थे।
10 जून के पत्र से मिला आंशिक स्पष्टीकरण
विरोध बढ़ने पर महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय ने 10 जून को एक स्पष्टीकरण जारी किया। पत्र में स्पष्ट किया गया कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था सभी प्रकार के लेखपत्रों और संस्थाओं के लिए अनिवार्य नहीं है। इसके दायरे में फिलहाल उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA), उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ और वाराणसी विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
भ्रम अभी भी दूर नहीं हुआ: बार एसोसिएशन
तहसील बार एसोसिएशन गाजियाबाद के सचिव दीपक वार्ष्णेय का कहना है कि महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-कौन सी संस्थाएं इस व्यवस्था के दायरे से बाहर हैं। इसी कारण अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि शासन का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा प्राधिकरणों और संस्थाओं तक व्यवस्था को सीमित रखना है, तो इसकी स्पष्ट और निर्विवाद जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या भ्रम न रहे।
धरना स्थल पहुंचे सहायक आयुक्त स्टांप

शुक्रवार को धरना स्थल पर सहायक आयुक्त स्टांप पहुंचे और हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं तथा बैनामा लेखकों से वार्ता की। उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया और हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की।
अधिवक्ताओं का दो टूक जवाब
हालांकि अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि जब तक शासन की ओर से स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं होता और सभी आशंकाओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
आम जनता भी हो रही प्रभावित
हड़ताल के चलते तहसील और रजिस्ट्री से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अधिवक्ताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल उनके हितों का नहीं, बल्कि भविष्य में रजिस्ट्री व्यवस्था में उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं को रोकने का प्रयास भी है।
