अपनी ही घर में असुरक्षित: महागुन मिराबेल हादसे ने सोसाइटी संस्कृति पर खड़े किए गंभीर सवाल

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महागुन मिराबेल हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, हाईराइज सोसाइटियों में पनप रही ‘टशन वाली ड्राइविंग‘ की खतरनाक संस्कृति का आईना है

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नोएडा। जिस स्थान को लोग अपने परिवार की सबसे सुरक्षित जगह मानते हैं, जब वहीं एक मां और उसकी मासूम बेटी कार के नीचे आ जाएं, तो यह महज एक दुर्घटना नहीं रह जाती। यह उस लापरवाही और असंवेदनशीलता का आईना बन जाती है, जो धीरे-धीरे देश की अनेक हाईराइज सोसाइटियों में सामान्य होती जा रही है।

नोएडा के सेक्टर-79 स्थित महागुन मिराबेल सोसाइटी में सोमवार रात हुई घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। सोसाइटी निवासी अरुण शर्मा, जो नोएडा की एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, अपनी पत्नी कृतिका शर्मा और बेटियों के साथ कार से सामान उतार रहे थे। परिवार अपने टावर की ओर बढ़ ही रहा था कि तभी बेसमेंट पार्किंग में दूसरी दिशा से मुड़कर आई एक कार ने कृतिका और उनकी पांच वर्षीय बेटी को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि मां और बेटी दोनों कार के नीचे फंस गईं। कुछ ही क्षणों में सामान्य पारिवारिक गतिविधि चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई। मौके पर मौजूद लोगों और परिजनों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। बच्ची को जल्दी बाहर निकाल लिया गया, लेकिन कृतिका कार के नीचे फंसी रहीं। काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका।

घायल मां-बेटी को तत्काल फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकीय जांच के बाद बच्ची को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई, लेकिन कृतिका की हालत गंभीर पाई गई। उनके सिर में चोट आई है, कई पसलियों में फ्रैक्चर हुआ है तथा कंधे में भी गंभीर चोटें आई हैं। उनका उपचार जारी है।

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि वाहन चालक नशे की हालत में नहीं था। लेकिन यही तथ्य इस घटना को और गंभीर बना देता है। क्योंकि यदि चालक नशे में नहीं था, तो फिर सवाल यह उठता है कि आखिर एक रिहायशी परिसर की पार्किंग में ऐसी दुर्घटना हुई कैसे?

जब समस्या शराब नहीं, मानसिकता बन जाए

मोड़ पर तेज रफ्तार से बिना ब्रेक के दौड़ती कार

अक्सर सड़क हादसों के बाद नशे में ड्राइविंग को वजह बताया जाता है। लेकिन महागुन मिराबेल की यह घटना बताती है कि हर दुर्घटना के पीछे शराब नहीं होती, कई बार उसके पीछे लापरवाही, असावधानी और “मुझे कुछ नहीं होगा” वाली मानसिकता होती है।

सोसाइटियों के भीतर वाहन चलाते समय कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि यह कोई एक्सप्रेस-वे नहीं, बल्कि हजारों लोगों का साझा आवासीय परिसर है। यहां हर मोड़ पर कोई बच्चा, बुजुर्ग, महिला या घरेलू सहायक पैदल चलता हुआ मिल सकता है।

हाईराइज सोसाइटियों में बढ़ता ‘टशन ड्राइविंग‘ का खतरा

आज देशभर की अनेक सोसाइटियों में एक नई समस्या तेजी से उभर रही है। कुछ निवासी परिसर के भीतर भी उसी अंदाज में वाहन चलाते हैं जैसे खुली सड़क या हाईवे पर चला रहे हों। तेज रफ्तार, अचानक मोड़ लेना, पार्किंग में बिना पर्याप्त सावधानी के प्रवेश करना और दूसरों को रास्ते से हटने के लिए मजबूर करना एक तरह से ‘स्टेटस सिंबल‘ बनता जा रहा है।

सबसे खतरनाक बात यह है कि यह सब उन स्थानों पर हो रहा है जहां सुरक्षा का स्तर सबसे अधिक होना चाहिए।

सीसीटीवी ने घटना रिकॉर्ड की, लेकिन हादसा नहीं रोक पाया

महागुन मिराबेल की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। फुटेज अब जांच का हिस्सा है। लेकिन यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि कैमरे केवल सबूत दे सकते हैं, सुरक्षा नहीं। सुरक्षा तब आएगी जब सोसाइटी प्रबंधन गति सीमा लागू करेगा, ब्लाइंड टर्न पर सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएंगे, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी और निवासी स्वयं यह समझेंगे कि वाहन चलाते समय उनके हाथों में केवल स्टीयरिंग नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है।

यह सिर्फ महागुन मिराबेल की खबर नहीं है

यह घटना नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और देशभर की उन हजारों सोसाइटियों के लिए चेतावनी है जहां लोग यह मानकर निश्चिंत रहते हैं कि परिसर के भीतर उनका परिवार सुरक्षित है। सवाल यह नहीं है कि दुर्घटना किसने की।सवाल यह है कि क्या हमारी सोसाइटियां ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार हैं ? क्योंकि जब एक मां अपनी पांच साल की बेटी के साथ अपने ही घर की पार्किंग में सुरक्षित नहीं है, तब यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे शहरी आवासीय तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

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