रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धासुमन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की अमर गाथा का किया स्मरण
रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान आज भी राष्ट्रभक्ति और नारी सशक्तिकरण का प्रेरणास्रोत : बी.के. शर्मा हनुमान
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संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में भारत की अमर वीरांगना एवं प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। रेलवे रोड स्थित रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई का नाम अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक के रूप में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष कर यह सिद्ध कर दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प और साहस ही सबसे बड़ी शक्ति है।

हनुमान ने कहा कि सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की अस्मिता और देश की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। उनका प्रसिद्ध उद्घोष “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” आज भी देशवासियों में आत्मसम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार करता है। उन्होंने अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर युद्धभूमि में जो अद्वितीय वीरता दिखाई, वह भारतीय इतिहास में अमर है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई केवल झांसी की शासक नहीं थीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल थीं। उनका जीवन आज भी युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय में युद्ध करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की, किंतु उनका बलिदान भारतीयों के हृदयों में सदैव अमर रहेगा।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे रानी लक्ष्मीबाई के आदर्शों, देशभक्ति, नारी सम्मान, साहस, स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन में अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. तोमर, आर.पी. शर्मा, मिलन मंडल, सुनीता बहस, नरेंद्र कुमार, मदनलाल बढ़वार, एस.पी. सिंह, फुरकान, दिलीप कुमार, रंजीत पोद्दार, मुकेश कुमार, श्यामलाल सरकार, एम.के. सामानिया, सोमल विश्वास सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभा के अंत में सभी ने एक स्वर में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के अमर बलिदान को नमन करते हुए कहा,
“खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी”
