अखिलेश ने ओपी राजभर को बताया ‘अफ़वाही मंत्री’, राजभर बोले, सांसदों को बचाओ अभियान शुरू करें
सपा में टूट की भविष्यवाणी, भ्रष्टाचार के आरोपों से पलटवार
राजभर-अखिलेश की जंग ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
NEWS1UP
पॉलिटिकल डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय सियासी हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी (सपा) में संभावित टूट को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर और सपा प्रमुख अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए, जिससे प्रदेश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।

प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सपा के कुछ सांसदों का एक बागी समूह शीघ्र ही सामने आएगा और उसका नेतृत्व बलिया का एक प्रमुख नेता करेगा। राजभर ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को सोशल मीडिया की राजनीति छोड़कर “अपने सांसदों को बचाओ अभियान” शुरू करना चाहिए।
अफ़वाही मंत्री फैला रहे भ्रम: अखिलेश यादव

राजभर के बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार करते हुए उन्हें “अफ़वाही मंत्री” करार दिया। अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि राजभर के पंचायती राज विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग और ठेके दिलाने के नाम पर कथित रूप से धन उगाही की गई है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अब विभाग के अधिकारी और ठेकेदार भी मंत्रीजी को ढूंढ़ रहे हैं और उनके खिलाफ ‘पंचायत’ बैठाने की तैयारी कर रहे हैं।
अखिलेश ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि टिकट दिलाने के नाम पर कथित रूप से एडवांस राशि लेने की चर्चाएं पहले से चल रही थीं और अब विभागीय स्तर पर भी ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर ओम प्रकाश राजभर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, राजभर ने सपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां ब्राह्मण समाज का अपमान हुआ, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह घटना पहले से चल रही नाराजगी को और बढ़ाने का कारण बनी है तथा पार्टी में फूट की संभावना को मजबूत करती है।
ओपी राजभर को कोई सीरियस नहीं लेता, शिवपाल का तंज
इस पूरे विवाद में सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव भी कूद पड़े। उन्होंने राजभर के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का कोई सांसद टूटने वाला नहीं है। शिवपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित नेता चुनावी माहौल बनाने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस तरह के बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि “ओम प्रकाश राजभर को उत्तर प्रदेश में कोई गंभीरता से नहीं लेता।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। राजभर और अखिलेश के बीच छिड़ी बयानबाजी ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
