निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं के आंदोलन को सपा का समर्थन
तहसील पहुंचकर सपा प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा समर्थन पत्र, रोजगार पर हमले का आरोप लगाते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के कार्यों का निजीकरण कर दस्तावेजों के पंजीकरण एवं निष्पादन का कार्य निजी एजेंसियों को सौंपने के प्रस्ताव के विरोध में प्रदेशभर के अधिवक्ता, बैनामा लेखक एवं सहायक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने आंदोलनरत अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों के समर्थन में खुलकर अपना पक्ष रखा है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर शुक्रवार को सपा का एक प्रतिनिधिमंडल गाजियाबाद तहसील पहुंचा। जिला अध्यक्ष फैसल हुसैन एडवोकेट, महानगर अध्यक्ष वीरेंद्र यादव एडवोकेट तथा पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विशाल वर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा एवं सचिव दीपक वार्ष्णेय को समर्थन पत्र सौंपते हुए आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
इस अवसर पर सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार की निजीकरण नीति अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों के रोजगार पर सीधा प्रहार है। उनका आरोप है कि सरकार का यह निर्णय हजारों परिवारों की आजीविका को प्रभावित करेगा और इससे आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सपा नेताओं ने बताया कि प्रदेश के लगभग 45 जिलों में अधिवक्ता एवं बैनामा लेखक इस निर्णय के विरोध में आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का प्रतीक बन चुका है।
समाजवादी पार्टी ने सरकार से मांग की कि अधिवक्ताओं एवं बैनामा लेखकों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल वार्ता कर विवाद का समाधान निकाला जाए तथा निजीकरण संबंधी निर्णय को वापस लिया जाए। पार्टी का कहना है कि लाखों लोगों के रोजगार और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
सपा नेताओं ने भरोसा दिलाया कि पार्टी अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों तथा आम जनता से जुड़े हर लोकतांत्रिक संघर्ष में उनके साथ खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।
