13 साल बाद भी नहीं मिला कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, फूटा ‘मोती रेजिडेंसी’ के निवासियों का गुस्सा

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GDA की बैठकों और नोटिसों के बावजूद अधर में अटकी वैधानिक मान्यता, सुविधाओं की कमी और बढ़े मेंटेनेंस शुल्क के विरोध में प्रदर्शन

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित स्थित मोती रेजिडेंसी में रविवार को वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर निवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के अभाव, अधूरी सुविधाओं, बढ़े हुए मेंटेनेंस शुल्क तथा कथित प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में बड़ी संख्या में निवासियों ने सोसायटी परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

कम्प्लीशन सर्टिफिकेट बना सबसे बड़ा मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि करीब 13 वर्ष पहले आबाद हुई इस आवासीय परियोजना को आज तक कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि वर्षों से फ्लैट मालिकों से मेंटेनेंस शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन परियोजना को वैधानिक रूप से पूर्ण कराने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

निवासियों के अनुसार, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट का मामला केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे सोसायटी की वैधानिक स्थिति, सुरक्षा मानकों, सुविधाओं के हस्तांतरण और निवासियों के अधिकार सीधे जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा अब उनके आंदोलन का केंद्र बन गया है।

GDA की बैठक में दिए गए थे आश्वासन

निवासियों ने बताया कि 23 मई को गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में अपर सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें बिल्डर असीम आनंद अग्रवाल और सोसायटी के प्रतिनिधि मौजूद थे।

बैठक में बिल्डर की ओर से आश्वासन दिया गया था कि स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप एसटीपी से संबंधित शेष कार्य 10 जून तक पूरे कर लिए जाएंगे तथा सभी टावरों की कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही 13 जून को प्रस्तावित बैठक में फोटोग्राफिक साक्ष्यों सहित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भरोसा भी दिया गया था। इसके अलावा सभी लंबित कार्य पूरे कर कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने तथा एओए का पंजीकरण कराकर सोसायटी का विधिवत हैंडओवर निवासियों को सौंपने तथा IFMS का पैसा देने की बात भी कही गई थी। 

हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी।

पहले भी जारी हो चुका है नोटिस

सूत्रों के अनुसार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने 6 मई को भी बिल्डर कंपनी ‘ट्रैकमैन बिल्डवैल प्राइवेट लिमिटेड’ को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर अपने दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान न होने से निवासियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

मेंटेनेंस शुल्क वृद्धि पर भी नाराजगी

प्रदर्शन में शामिल निवासियों ने हाल ही में बढ़ाए गए मेंटेनेंस शुल्क पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पहले जहां लगभग 1.60 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से शुल्क लिया जा रहा था, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 2 रुपये प्रति वर्गफुट कर दिया गया है। उनका तर्क है कि जब मूलभूत सुविधाएं और वैधानिक प्रक्रियाएं ही अधूरी हैं तो शुल्क वृद्धि का औचित्य समझ से परे है।

बिजली और सीवर व्यवस्था पर उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान कुछ निवासियों ने परियोजना में कथित बिजली चोरी के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि इस संबंध में कई शिकायतें संबंधित विभागों को दी जा चुकी हैं और मामले की जांच चल रही है। वहीं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवर व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि एसटीपी की व्यवस्था होने के बावजूद परिसर में सीवर और जल निकासी से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।

हैंडओवर की मांग हुई तेज

निवासियों का कहना है कि परियोजना का विधिवत हैंडओवर अब तक नहीं हो सका है। उनका मानना है कि एओए के गठन और वैधानिक हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने से ही सोसायटी के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।

बिल्डर का पक्ष नहीं मिल सका

इस संबंध में बिल्डर असीम आनंद अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी कराने, लंबित विकास कार्यों को पूर्ण कराने, बिजली संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने तथा सोसायटी का वैधानिक हैंडओवर सुनिश्चित कराने की मांग की।

 

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