राम मंदिर चढ़ावा विवाद: हाईकोर्ट ने नहीं दिखाई जल्दबाजी, SIT जांच पर टिकीं निगाहें
दान राशि में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच तुरंत सुनवाई से फिलहाल इंकार, सीएम योगी को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
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भूमेश शर्मा
प्रयागराज/अयोध्या। देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जहां एक ओर विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल में जुटा है, वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए कहा है कि फिलहाल किसी प्रकार की न्यायिक जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।
सोमवार को दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू कर चुकी है, इसलिए इस स्तर पर अदालत के तत्काल सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती। यह याचिका दिनभर सूचीबद्ध 529 नए मामलों में 392वें क्रम पर लगी थी।

स्वतंत्र जांच और CAG ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने अदालत से मांग की थी कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे के प्रबंधन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से मंदिर निधियों का विशेष ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए जाएं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो सकती है।
मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर बनी SIT
उल्लेखनीय है कि 13 जून को मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के कथित दुरुपयोग की शिकायतें सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। जांच दल में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपने की तैयारी में है।
जांच के सामने सबसे बड़ी चुनौती: मिट चुके डिजिटल सबूत
मामले की जांच कर रही SIT के सामने सबसे बड़ी बाधा डिजिटल साक्ष्यों की उपलब्धता को लेकर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद वह स्वतः डिलीट हो जाता है। ऐसे में यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हों, तो उनके प्रत्यक्ष डिजिटल प्रमाण जुटाना जांच एजेंसियों के लिए कठिन हो सकता है।
आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से व्यापक जनचर्चा को जन्म दिया है। हालांकि अभी तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है, लेकिन SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच दल अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करता है और क्या इस मामले में किसी स्तर पर जवाबदेही तय की जाती है या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट के रुख से इतना स्पष्ट है कि न्यायपालिका राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया को अपना काम पूरा करने का अवसर देना चाहती है।
