ऑडिट रिपोर्ट से उठी कानूनी आंधी: एफआईआर के घेरे में आए 6 प्रत्याशी OUT !

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सेवी विला डे AOA चुनाव बना ‘लीगल बैटलग्राउंड’”

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की चर्चित सेवी विला डे सोसाइटी में एओए चुनाव से ठीक पहले ऐसा कानूनी विस्फोट हुआ है, जिसने पूरे चुनावी समीकरण को उलट कर रख दिया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर अब सीधे चुनावी मैदान को प्रभावित कर रही है। प्रशासन द्वारा नियुक्त चुनाव अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए हैं।

ऑडिट रिपोर्ट से एफआईआर और अब चुनावी ‘क्लीन-अप’

जानकारी के अनुसार, सोसाइटी की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत गड़बड़ियों के गंभीर संकेत सामने आए थे। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 6 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई। इसे ‘मटेरियल सप्रेशन ऑफ फैक्ट्स’ मानते हुए चुनाव अधिकारी ने बिना देरी के सभी 6 नामांकन निरस्त कर दिए।

आरोप छुपाए तो सीधा OUT

चुनाव अधिकारी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि इस बार नियमों से कोई समझौता नहीं होगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक, आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

पद का दुरुपयोग किया तो उम्मीदवारी खत्म

मॉडल बायलॉज के तहत चुनावी नियमों का एक और बड़ा प्रावधान भी चर्चा में है। यदि कोई पूर्व पदाधिकारी अपने कार्यकाल में पद के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है, तो उसकी उम्मीदवारी स्वतः रद्द हो सकती है। यानी, ऑडिट रिपोर्ट और उस पर दर्ज एफआईआर केवल जांच का विषय नहीं, बल्कि सीधे तौर पर चुनाव लड़ने की पात्रता तय करने वाला कारक बन चुकी है।

20 से 14: मुकाबला सिमटा, तनाव बढ़ा

कुल 20 उम्मीदवारों में से 6 के बाहर होने के बाद अब 14 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं। इनमें 9 टीम एसवीडी, 4 निवर्तमान बोर्ड और 1 स्वतंत्र उम्मीदवार शामिल हैं। मुकाबला अब और ज्यादा सीधा और कांटेदार हो गया है।

एकतरफा कार्रवाई, पूर्व बोर्ड का आरोप

पूर्व बोर्ड के नेपाल सिंह ने इस कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिस आधार पर उनकी टीम के सदस्यों को बाहर किया गया है, वही स्थिति अन्य कुछ उम्मीदवारों पर भी लागू होती है।
उन्होंने इसे “चयनात्मक कार्रवाई” बताते हुए कोर्ट जाने की बात कही है।

एसवीडी का वादा, हर खर्च का हिसाब सार्वजनिक

दूसरी ओर टीम एसवीडी के विकास सिंह ने पारदर्शिता को अपना मुख्य एजेंडा बताया। उनका कहना है कि यदि उनकी टीम जीतती है तो हर महीने की 10 तारीख तक सोसाइटी का पूरा खर्च सार्वजनिक किया जाएगा और सभी बड़े फैसले आम सभा के जरिए होंगे।

चुनाव नहीं, अब ‘जवाबदेही बनाम आरोप’ की जंग

सेवी विला डे का यह चुनाव अब सिर्फ प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं रहा। यह चुनाव अब साफ-सुथरे प्रशासन बनाम आरोपों से घिरे चेहरों के बीच सीधी टक्कर बन चुका है।

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