देखिए… हादसे ने चेतावनी नहीं दी !

0

बेंगलुरु में चलते बाइक सवार पर अचानक गिरी पेड़ की टहनी, बिना हेलमेट सिर पर लगी गंभीर चोट, चालक कोमा में

यह घटना बताती है कि हेलमेट पुलिस के चालान से नहीं, जिंदगी बचाने के लिए पहनिए

NEWS1UP

फीचर

भूमेश शर्मा

वह रोज़ की तरह घर से निकला था। शायद पत्नी ने कहा होगा, “जल्दी लौट आइए” शायद बच्चों ने हाथ हिलाकर विदा किया होगा। शायद उसने भी मुस्कुराकर जवाब दिया होगा, “बस शाम तक आ जाऊँगा।” लेकिन उसे क्या पता था कि कुछ ही मिनट बाद उसका जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा।

न कोई ट्रक सामने आया, न किसी कार ने टक्कर मारी और न किसी ने ट्रैफिक नियम तोड़े। उसकी जिंदगी को बदलने के लिए इतना ही काफी था कि सड़क किनारे खड़े एक सूखे पेड़ की टहनी अचानक टूटी और सीधे उसके सिर पर आ गिरी। बाइक सड़क पर गिर गई, और वह भी। जब तक लोग दौड़कर पहुंचे, वह बेहोश हो चुका था। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि सिर में गंभीर चोट है, मरीज कोमा में है। 

 

यह घटना बेंगलुरु के 52 वर्षीय सतीश के साथ हुई। लेकिन सच यह है कि यह कहानी केवल सतीश की नहीं है। यह कहानी हर उस व्यक्ति की है जो आज भी बिना हेलमेट बाइक चलाते हुए यह सोचता है। मुझे क्या होगा ?

एक सेकंड… और पूरी जिंदगी बदल गई

…अगले ही पल बाइक सवार सड़क पर गिर पड़ा, बिना हेलमेट सिर पर लगी गंभीर चोट ने उसकी जिंदगी बदल दी

जीवन में कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनमें गलती आपकी नहीं होती। आप सावधानी से वाहन चला रहे होते हैं, फिर भी कोई दूसरा वाहन टक्कर मार देता है। कभी सड़क का गड्ढा मौत का कारण बन जाता है। कभी आवारा पशु सामने आ जाता है। कभी किसी वाहन का टायर फट जाता है। और कभी… पेड़ की एक सूखी टहनी आपकी पूरी दुनिया उजाड़ देती है। यही सड़क की सबसे बड़ी सच्चाई है, दुर्घटनाएँ कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आतीं।

हेलमेट पुलिस के लिए नहीं, आपके परिवार के लिए है

हमारे समाज में हेलमेट को लेकर एक अजीब मानसिकता बन गई है। चौराहे पर पुलिस दिखाई दी… हेलमेट पहन लिया। चेकिंग खत्म हुई… हेलमेट फिर हैंडल पर टांग दिया। जैसे हेलमेट सिर की नहीं, पुलिस की जरूरत हो। कुछ युवाओं को लगता है कि हेलमेट पहनने से उनका स्टाइल खराब हो जाएगा। कुछ लोगों को गर्मी लगती है, कुछ कहते हैं, “बस गली तक ही तो जाना है।”  और कुछ इसे अपनी ‘शान’ का सवाल बना लेते हैं।

लेकिन सड़क न आपकी शान पहचानती है…

न आपका रुतबा

न आपकी उम्र

और न ही आपका अनुभव

सड़क केवल आपकी एक गलती और एक लापरवाही पहचानती है।

हादसे का समय नहीं होता… इसलिए सुरक्षा भी हर समय होनी चाहिए

सबसे बड़ा भ्रम यही है कि दुर्घटनाएँ केवल लंबी यात्राओं में होती हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएँ घर से कुछ किलोमीटर की दूरी के भीतर होती हैं। यानी वही रास्ता… जिसे हम सबसे सुरक्षित मानते हैं।

ट्रैफिक और हेल्थ विशेषज्ञ कहते हैं, “छोटी दूरी के लिए हेलमेट छोड़ना, सबसे बड़ा जोखिम है।”

अगर हेलमेट होता…

एक पल… और जिंदगी बदल गई, घायल सतीश को सँभालने की कोशिश करते लोग

यह प्रश्न अब हमेशा लोगों के मन में रहेगा कि क्या सतीश कोमा में जाने से बच जाते ? क्या उनका परिवार आज इस पीड़ा से बच जाता ? इन सवालों का निश्चित उत्तर शायद कभी न मिले।

लेकिन एक बात निश्चित है कि- 

हेलमेट सिर पर लगने वाली चोट की तीव्रता को काफी हद तक कम करता है।

यही कारण है कि दुनिया भर में इसे दोपहिया वाहन चालक की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा माना जाता है।

सिर्फ एक व्यक्ति नहीं घायल होता, पूरा परिवार घायल हो जाता है

जब किसी बाइक सवार के सिर में गंभीर चोट लगती है, तो अस्पताल के बिस्तर पर केवल एक व्यक्ति नहीं होता। उसके साथ आईसीयू के बाहर पूरी रात जागता उसका परिवार भी होता है। 

बच्चे होते हैं

पत्नी होती है

बूढ़े माता-पिता होते हैं

और उनके साथ जुड़ी अनगिनत उम्मीदें होती हैं। एक हेलमेट न पहनने की कीमत कई बार पूरा परिवार जिंदगी भर चुकाता है।

हेलमेट की कीमत कुछ हजार रुपये, लेकिन इसकी अहमियत एक जिंदगी से कम नहीं

लोग लाखों रुपये की बाइक खरीद लेते हैं, हजारों रुपये का मोबाइल जेब में रखते हैं,  महंगे कपड़े पहनते हैं, लेकिन अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट खरीदने में उन्हें खर्च दिखाई देता है। विडंबना यह है कि मोबाइल टूट जाए तो नया खरीदा जा सकता है, लेकिन सिर पर लगी गंभीर चोट जिंदगी भर नहीं भरती।

आज नहीं सुधरे तो अगली खबर किसी और की नहीं, शायद आपकी हो

बेंगलुरु की यह घटना केवल एक समाचार नहीं है। यह एक आईना है, जिसमें हर दोपहिया चालक अपना चेहरा देख सकता है। सवाल यह नहीं कि सतीश के साथ क्या हुआ।

सवाल यह है कि-

क्या हम इस घटना से कुछ सीखेंगे ?

या अगली बार किसी और शहर में, किसी और सड़क पर, किसी और परिवार की दुनिया इसी तरह उजड़ जाएगी ?

आख़िर में सिर्फ इतना…

जब भी बाइक या स्कूटी स्टार्ट करें तो एक सेकंड रुकिए, हेलमेट पहनिए। उसकी स्ट्रैप अच्छी तरह बांधिए। 

क्योंकि…

घर पर कोई आपका इंतज़ार कर रहा है

उसे आपकी बाइक नहीं…

आपकी सलामती चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!